नई विद्युत दरों का ब्लूप्रिंट तैयार, उत्तराखंड ऊर्जा निगमों के प्रस्ताव पर आज नियामक आयोग की मोहर

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देहरादून। उत्तराखंड के बिजली उपभोक्ताओं की जेब पर अप्रैल से अतिरिक्त बोझ पड़ना लगभग तय माना जा रहा है। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग में प्रस्तावित नई विद्युत दरों को लेकर आज निर्णायक जनसुनवाई होने जा रही है। प्रदेश के तीनों ऊर्जा निगमों यूपीसीएल,यूजेवीएनएल और पिटकुल द्वारा प्रस्तुत टैरिफ पिटीशन के आधार पर बिजली दरों में औसतन 18.50 प्रतिशत की बढ़ोतरी संभावित है।

नियामक आयोग आज अपनी अंतिम जनसुनवाई कर रहा है। इसमें प्रदेश का कोई भी उपभोक्ता निगमों द्वारा प्रस्तावित भारी बढ़ोतरी के खिलाफ अपनी आपत्ति या सुझाव दर्ज करा सकता है। आयोग के सचिव नीरज ने बताया कि जनसुनवाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आयोग सभी तथ्यों, आपत्तियों और निगमों की वित्तीय स्थिति का बारीकी से अध्ययन करेगा। इसके बाद ही टैरिफ पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। नई दरें 1 अप्रैल 2026 से पूरे प्रदेश में प्रभावी हो जाएंगी। इस वर्ष के प्रस्ताव में यूपीसीएल ने सबसे अधिक 16.23 प्रतिशत की वृद्धि की मांग की है। वहीं, पिटकुल की ओर से लगभग 3 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया गया है। दिलचस्प बात यह है कि पहली बार यूजेवीएनएल का टैरिफ प्रस्ताव माइनस 1.2 प्रतिशत रहा है। हालांकि, तीनों निगमों का संयुक्त प्रभाव उपभोक्ताओं के लिए 18.50 प्रतिशत की भारी वृद्धि के रूप में सामने आ सकता है। आयोग ने इस बार जनसुनवाई का दायरा बढ़ाते हुए दूरस्थ क्षेत्रों को भी शामिल किया है। गढ़वाल मंडल में देहरादून के साथ कर्णप्रयाग और कुमाऊं मंडल में रुद्रपुर के साथ मुनस्यारी में सुनवाई आयोजित की जा रही है। इसका उद्देश्य पहाड़ी और सीमांत क्षेत्रों के उपभोक्ताओं की समस्याओं और विचारों को सीधे टैरिफ प्रक्रिया में शामिल करना है। पिछली बार की तुलना में इस साल निगमों ने घाटे और परिचालन लागत का हवाला देते हुए बड़ी वृद्धि का प्रस्ताव रखा है। अब सबकी नजरें नियामक आयोग पर टिकी हैं कि वह जनसुनवाई के बाद उपभोक्ताओं को कितनी राहत देता है। यदि प्रस्तावित दरों को हरी झंडी मिलती है, तो घरेलू और औद्योगिक दोनों तरह के उपभोक्ताओं के मासिक बिल में बड़ा उछाल देखने को मिलेगा।