नई दिल्ली। दिल्ली से एक बड़ी खबर सामने आई है, यहां बहुचर्चित शराब नीति से जुड़े मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को आरोपों से बरी कर दिया है। कोर्ट की ओर से दोनों को क्लीन चीट मिली है। कोर्ट ने साफ कहा कि केवल दावे करने से काम नहीं चलेगा। कोर्ट किसी भी आरोप पर तभी भरोसा कर सकती है जब उसके साथ ठोस और पर्याप्त सबूत हों। कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसी की ओर से पेश किए गए सबूत कमजोर और अपर्याप्त हैं। सबसे पहले अदालत ने कुलदीप सिंह, जो आबकारी विभाग में कमिश्नर रहे हैं, उन्हें बरी किया। इसके बाद मनीष सिसोदिया को राहत दी गई और फिर अरविंद केजरीवाल को भी बरी करने का आदेश दिया गया। कोर्ट की टिप्पणी से यह स्पष्ट हुआ कि दाखिल की गई चार्जशीट में कई खामियां थीं। अदालत ने कहा कि कई ऐसे बिंदु हैं जिन पर संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। इसी आधार पर राहत दी गई। हालांकि जांच एजेंसी का कहना है कि वह इस आदेश से संतुष्ट नहीं है और इसे हाईकोर्ट में चुनौती देगी। सीबीआई के वकीलों की ओर से संकेत दिया गया है कि आदेश का विस्तृत अध्ययन करने के बाद ऊपरी अदालत में अपील दायर की जाएगी।
यह मामला 2022-23 के दिल्ली एक्साइज पॉलिसी से जुड़ा है। उसी आधार पर सीबीआई ने केस दर्ज किया था और बाद में ईडी ने भी मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में मामला दर्ज किया। आम आदमी पार्टी के कई नेता इस केस में जेल गए थे। कई बार जमानत याचिकाएं खारिज हुईं, बाद में जमानत मिली। शुक्रवार को दिल्ली के राउस एवेन्यू कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया सीबीआई की चार्जशीट के आधार पर अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के खिलाफ मामला नहीं बनता। कोर्ट ने चार्जशीट को कमजोर बताते हुए राहत दी है। कोर्ट ने कहा कि जब किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति या सार्वजनिक पदधारी पर गंभीर आरोप लगाए जाते हैं, तो उन्हें साबित करने के लिए ठोस सामग्री होना जरूरी है। केवल आरोपों के आधार पर आरोप तय नहीं किए जा सकते।

