देहरादून। नीट परीक्षा पेपर लीक मामले को लेकर देश भर में जारी भारी आक्रोश के बीच उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की सड़कें सोमवार, 8 जून को रणक्षेत्र में तब्दील हो गईं। विपक्षी दल कांग्रेस और उसके छात्र संगठन एनएसयूआई (NSUI) ने केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए देहरादून में एक विशाल और उग्र विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान कांग्रेस और एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं ने उत्तराखंड सचिवालय कूच कर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की पुरजोर मांग की। सचिवालय से पहले प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस को भारी मशक्कत करनी पड़ी और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन (पानी की बौछार) का इस्तेमाल भी करना पड़ा।
एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाकड़ के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने जब सचिवालय का घेराव करने के लिए कदम बढ़ाए, तो पुलिस ने सुभाष रोड पर भारी बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया। खुद को रोके जाने से नाराज प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई, जो देखते ही देखते धक्का-मुक्की में बदल गई। इस बीच, कई आक्रोशित छात्र सरकार विरोधी नारे लगाते हुए पुलिस की बैरिकेडिंग के ऊपर चढ़ गए। माहौल बेहद तनावपूर्ण होता देख पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नीचे उतारने के लिए वाटर कैनन का प्रयोग किया। पानी की तेज बौछारों के बावजूद छात्र बैरिकेडिंग पर डटे रहे और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए अपना गुस्सा जाहिर किया। छात्रों और युवाओं के इस आंदोलन को धार देने के लिए कांग्रेस के कई दिग्गज नेता भी सड़कों पर उतरे। प्रदर्शन में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत और चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह प्रमुख रूप से शामिल हुए। मैदानी संघर्ष और बढ़ते हंगामे को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की और एनएसयूआई कार्यकर्ताओं सहित वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रीतम सिंह को हिरासत में लेकर पुलिस लाइन भेज दिया। सचिवालय कूच के दौरान कांग्रेस और छात्र संगठन के नेताओं ने केंद्र सरकार पर चौतरफा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि आज देश की पूरी परीक्षा प्रणाली संदेह के घेरे में आ गई है। पेपर संपन्न होने से पहले ही लीक हो जा रहे हैं और इसमें कहीं न कहीं सत्ताधारी दल से जुड़े लोगों की साठ-गांठ है। कांग्रेस नेताओं ने तीखे सवाल उठाते हुए कहा इतने बड़े घोटाले और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ के बाद भी देश के शिक्षा मंत्री को अपने पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। देश भर में सैकड़ों होनहार छात्र इस विफलता के कारण डिप्रेशन और आत्महत्या का शिकार हो चुके हैं, लेकिन सरकार का कोई भी नुमाइंदा उनके आंसू पोंछने तक नहीं गया। भाजपा नेताओं की यह रहस्यमयी चुप्पी दर्शाती है कि वे दोषियों को बचाना चाहते हैं। एनएसयूआई ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि पेपर लीक के खिलाफ उनकी यह जंग तब तक जारी रहेगी, जब तक शिक्षा मंत्री अपने पद से इस्तीफा नहीं दे देते। इसके लिए चाहे उन्हें जेल की सलाखों के पीछे ही क्यों न जाना पड़े। छात्र संगठन ने ऐलान किया कि आज उन्होंने उत्तराखंड सचिवालय का घेराव किया है, और यदि सरकार ने जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो आने वाले दिनों में दिल्ली जाकर सीधे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के आवास का घेराव किया जाएगा।

