उत्तराखंड की राजनीति और समाज में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब प्रदेश की महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य का एक भावुक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में रोते हुए अपनी आपबीती सुनाती कैबिनेट मंत्री केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि एक लाचार माँ और पीड़ित पत्नी के रूप में नज़र आईं। यह घटना इस कड़वे सच को उजागर करती है कि घरेलू हिंसा, मानसिक प्रताड़ना और धोखाधड़ी का दायरा किसी आम या खास तक सीमित नहीं है। जब एक सशक्त और संवैधानिक पद पर बैठी महिला को न्याय और सुरक्षा के लिए सोशल मीडिया पर रोना पड़े, तो यह पूरे समाज के लिए एक गंभीर चिंतन का विषय बन जाता है।
महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य का रोते हुए वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया है। अपने वैवाहिक जीवन से जुड़े गंभीर आरोपों को लेकर मंत्री की ओर से जारी वीडियो ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। इस मामले में फिल्म अभिनेता हेमंत पांडे भी रेखा आर्य के समर्थन में उतर आए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मामले में कार्रवाई की अपील करने की बात कही है। मंत्री रेखा आर्य ने अपने पति गिरधारी लाल साहू पर जालसाजी, जातिगत प्रताड़ना और जान से मारने का षड्यंत्र रचने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत के आधार पर देहरादून के कैंट थाने में प्राथमिकी दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, इन आरोपों की सच्चाई का निर्धारण पुलिस की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा। सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में रेखा आर्य भावुक नजर आ रही हैं। उन्होंने कहा कि पति से जुड़े एक कथित ऑडियो ने उनके वैवाहिक जीवन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उनके मुताबिक, इस घटनाक्रम से उन्हें गहरा मानसिक आघात पहुंचा और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस में शिकायत देने का निर्णय लेना पड़ा। मंत्री ने आरोप लगाया कि उनके पति पहले से विवाहित हैं और उनके विवाहेतर संबंध भी हैं। इन आरोपों को लेकर अब पुलिस की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मामले में सामने आए कथित ऑडियो की प्रामाणिकता और उसमें कही गई बातों की सत्यता की पुष्टि भी जांच के बाद ही हो सकेगी। रेखा आर्य ने कहा कि उन्हें अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए यह कदम उठाना पड़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका वीडियो केवल अपनी पीड़ा बताने के लिए नहीं, बल्कि दूसरी महिलाओं तक संदेश पहुंचाने के लिए भी है। वीडियो में मंत्री ने महिलाओं से घरेलू अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि कोई महिला सामान्य परिवार से हो या किसी महत्वपूर्ण पद पर आसीन हो, उसे अत्याचार सहने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए। रेखा आर्य ने संविधान को साक्षी मानकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते रहने की बात कही। उन्होंने भरोसा जताया कि इस कठिन समय में देवभूमि के लोग उनके साथ खड़े होंगे। इस पूरे घटनाक्रम में एक अहम सवाल यह भी है कि घरेलू हिंसा या प्रताड़ना की शिकायत सामने आने पर पीड़ित महिला को किस तरह सुरक्षा और न्याय मिलना चाहिए। कानून की नजर में प्रत्येक शिकायत की निष्पक्ष जांच और शिकायतकर्ता की सुरक्षा सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है। मंत्री रेखा आर्य के समर्थन में फिल्म अभिनेता हेमंत पांडे के सामने आने के बाद मामला और चर्चा में आ गया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड ही नहीं, देश की किसी भी बेटी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाना चाहिए। हेमंत पांडे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस मामले में कार्रवाई के लिए अनुरोध करने की बात कही। उनके समर्थन के बाद यह मामला केवल एक पारिवारिक विवाद तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि महिला सुरक्षा और न्याय के सवालों के साथ भी जुड़ गया है। एक ओर मंत्री के भावुक वीडियो ने लोगों का ध्यान खींचा है, वहीं दूसरी ओर उनके पति पर लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस की भूमिका, उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल और दोनों पक्षों के तथ्यों का परीक्षण मामले की दिशा तय करेंगे। यह प्रकरण एक महत्वपूर्ण संदेश भी देता है कि घरेलू प्रताड़ना से जुड़ी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। पद, प्रतिष्ठा या सामाजिक पहचान से परे हर महिला को सुरक्षा और न्याय पाने का अधिकार है। अब सबकी निगाहें पुलिस की जांच और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।

