उत्तराखंड बागवानी समाचार: नर्सरियों में अब मिलेगा फल और सब्जी का हाइब्रिड स्टॉक और उन्नत कृषि यंत्रों की जानकारी

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देहरादून | उत्तराखंड के कृषि और उद्यान क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए राज्य सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। प्रदेश की 92 सरकारी नर्सरियों को पुनर्जीवित करने के लिए उद्यान विभाग ने एक व्यापक मास्टर प्लान तैयार किया है। इस योजना का सबसे आकर्षक पहलू यह है कि अब इन नर्सरियों में स्थानीय फसलों के साथ-साथ विदेशी (यूरोपीय) सब्जियों के बीज और पौध भी तैयार किए जाएंगे, जिससे पहाड़ के किसानों की आजीविका में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है।

सचिव एस.एन. पांडेय के अनुसार, प्रत्येक नर्सरी के लिए विशेष नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। ये अधिकारी नर्सरियों की वर्तमान स्थिति का आकलन कर अगले दो वर्षों के लिए अल्पकालिक, मध्यम और दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार करेंगे। योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज और क्लोनल रूट स्टॉक उपलब्ध कराना है, ताकि बागवानी में आधुनिक तकनीक का समावेश हो सके। बाजार की बदलती मांग को देखते हुए अब उत्तराखंड की नर्सरियों में यूरोपीय सब्जियों की पौध उत्पादन इकाइयां स्थापित की जाएंगी। इससे न केवल स्थानीय किसानों को नई फसलों के विकल्प मिलेंगे, बल्कि उनकी आय में भी इजाफा होगा। विभाग ने सख्त निर्देश दिए हैं कि यदि किसी भी नर्सरी की भूमि पर अतिक्रमण पाया जाता है, तो उसे जिला प्रशासन के सहयोग से तत्काल हटाया जाएगा। जो भूमि वर्तमान में बंजर या उपयोग में नहीं है,उसे अगले तीन महीनों के भीतर खेती योग्य बनाने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, पूरी नर्सरी की मजबूत घेराबंदी की जाएगी ताकि जंगली जानवरों और बाहरी हस्तक्षेप से सुरक्षा हो सके। कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सचिव पांडेय ने बताया कि इस पुनर्जीवन अभियान से न केवल नर्सरियों की सूरत बदलेगी, बल्कि यह प्रदेश के बागवानी क्षेत्र के लिए 'मिशन मोड' की तरह काम करेगा। नर्सरियों के इस कायाकल्प से उत्तराखंड 'हॉर्टिकल्चर हब' बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा, जिससे पलायन रोकने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में मदद मिलेगी।