govt-ads

चमोली हादसे के बाद बेंगलुरु के रिहायशी इलाकों में पसरा मातम और सन्नाटा

Blog
 Image

देहरादून। उत्तराखंड के चमोली जिले में शुक्रवार को हुए हेलीकॉप्टर हादसे ने 6 परिवारों की खुशियां छीन ली। बदरीनाथ धाम पहुंचकर खुशी-खुशी दर्शन करने वाले इन यात्रियों को शायद अंदाजा भी नहीं था कि घर लौटने की उनकी यह उड़ान जिंदगी का आखिरी उड़ान होगी। जानकारी के अनुसार, कर्नाटक से आए श्रद्धालु गुरुवार सुबह करीब 10 बजे हेलीकॉप्टर से बदरीनाथ धाम पहुंचे थे। भगवान के दर्शन और सीमांत माणा गांव के भ्रमण के बाद श्रद्धालुओं ने गाइड से उसी दिन वापस लौटने की इच्छा जताई थी। हालांकि, नियमों और मौसम की प्रतिकूलता के चलते उन्हें शुक्रवार की सुबह वापसी की अनुमति दी गई। शुक्रवार सुबह भी घाटी में घना कोहरा और खराब मौसम के चलते उड़ान में देरी हुई। स्थिति सामान्य होने पर दोपहर 1 बजकर 12 मिनट पर हेलीकॉप्टर ने देहरादून के लिए उड़ान भरी। उड़ान भरने के महज 15 मिनट बाद ही हेलीकॉप्टर का एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) और बेस कैंप से संपर्क टूट गया। कुछ ही देर में जोशीमठ के निकटवर्ती पहाड़ी इलाके में हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने की पुष्टि हुई। हादसे में जान गंवाने वाले यात्रियों की पहचान बेंगलुरु निवासी प्रताप, अरुण सालुंके, शंकर गौड़ा, के. सुधीर और एचएस नटराज के रूप में हुई है। वहीं, हेलीकॉप्टर उड़ा रहे कैप्टन दिल्ली के रहने वाले थे। मृतकों में शामिल अरुण सालुंके कर्नाटक पुलिस के 2007 बैच के इंस्पेक्टर थे और वर्तमान में बेंगलुरु की सेंट्रल क्राइम ब्रांच (सीसीबी) में तैनात थे। बेलगावी जिले के रहने वाले अरुण ने अपने करियर की शुरुआत दिल्ली में इंटेलिजेंस विंग से की थी। अपनी कार्यकुशलता और कर्तव्यनिष्ठा के लिए पहचाने जाने वाले सालुंके के निधन से पुलिस विभाग स्तब्ध है। वहीं, हादसे में जान गंवाने वाले शंकर गौड़ा पेशे से बेंगलुरु के जाने-माने वकील थे। पड़ोसियों के अनुसार, शंकर गौड़ा एक बेहद मिलनसार और धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति थे, जो समाज के हर वर्ग की मदद के लिए सदैव तत्पर रहते थे। कुछ घंटे पहले तक जिस यात्रा में भक्ति और उल्लास का माहौल था, इस अचानक हुए हादसे ने उसे गहरे मातम में तब्दील कर दिया।