चीन की वायरल घटना से पर्यावरण चिंता

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नई दिल्ली। चीन से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित किया है। यहां एक ऐसी अनोखी और चौंकाने वाली अंतिम यात्रा ने सोशल मीडिया से लेकर प्रशासन तक में तीखी बहस छेड़ दी है। दरअसल, लियाओनिंग प्रांत में एक परिवार ने अपने मृत परिजन के अंतिम संस्कार के दौरान एक महंगी लग्जरी कार को कब्र में दफना दिया, जिसका वीडियो सामने आने के बाद यह घटना तेजी से वायरल हो गई। रिपोर्ट के अनुसार, परिवार ने Mercedes-Benz S450L जैसी लग्जरी कार को कब्र में रखने का फैसला किया। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक खुदाई मशीन की मदद से कार को गड्ढे में उतारा गया और फिर उसे मिट्टी से ढक दिया गया। बताया जा रहा है कि इस कार की कीमत लगभग 15 लाख युआन (करीब 1.49 करोड़ रुपये) थी। इस घटना का एक और दिलचस्प पहलू कार का नंबर प्लेट ‘8888’ होना है, जिसे चीन में बेहद शुभ और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसी वजह से कई लोग इस पूरे मामले को सांस्कृतिक और प्रतीकात्मक दृष्टिकोण से भी देख रहे हैं। परिवार का कहना है कि यह कदम उन्होंने पारंपरिक मान्यताओं के तहत उठाया। चीन की कुछ परंपराओं में यह माना जाता है कि मृत व्यक्ति के साथ उनकी प्रिय या उपयोगी वस्तुएं दफनाई जाती हैं, ताकि वे परलोक में उनके काम आ सकें।

हालांकि, जिस स्तर पर इस परंपरा का पालन किया गया, उसने आम लोगों को हैरान कर दिया। सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कई लोगों ने इसे संसाधनों की बर्बादी और पर्यावरण के लिए हानिकारक बताया। उनका कहना है कि इतनी महंगी कार को जमीन में दफनाना गैर-जिम्मेदाराना है। वहीं, कुछ लोगों ने इसे परिवार की निजी आस्था और सम्मान प्रकट करने का तरीका बताते हुए समर्थन भी किया। मामला तूल पकड़ने के बाद स्थानीय प्रशासन ने हस्तक्षेप किया। अधिकारियों ने इस कृत्य को ‘सामंती अंधविश्वास’ करार देते हुए ऐसे कार्यों के खिलाफ सख्त चेतावनी जारी की है। सिविल अफेयर्स विभाग ने पुष्टि की है कि परिवार को फटकार लगाई गई है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। विवाद बढ़ने पर संबंधित परिवार ने सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब परिवार पर आर्थिक जुर्माना लगाया जा सकता है। साथ ही, उन्हें कार को कब्र से निकालने, स्थल को साफ करने और पर्यावरण को बहाल करने की जिम्मेदारी भी सौंपी जा सकती है। यह घटना परंपरा, आस्था, पर्यावरण और जिम्मेदारी के बीच संतुलन को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा करती है। जहां एक ओर लोग इसे सांस्कृतिक मान्यता से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आधुनिक समाज में ऐसे कदमों की प्रासंगिकता और प्रभाव को लेकर गंभीर चर्चा जारी है।