हरिद्वार। उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी के बाद अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कैबिनेट बैठक सोमवार को हरिद्वार में होने जा रही है। इस महत्वपूर्ण बैठक से ठीक पहले सूबे की राजनीति में सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस विधायक अनुपमा रावत ने प्रदेश सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हुए दो टूक चेतावनी दी है कि यदि कैबिनेट बैठक में उनकी प्रमुख मांगें नहीं मानी गईं, तो वे आमरण अनशन करने के लिए बाध्य होंगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में सोमवार को हरिद्वार में होने वाली कैबिनेट बैठक से पहले सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस विधायक अनुपमा रावत ने प्रदेश सरकार के सामने दो प्रमुख मांगें रखते हुए साफ चेतावनी दी है कि यदि इन पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो वह आमरण अनशन करेंगी। उनकी प्रमुख मांगों में लालढांग क्षेत्र में रवासन नदी पर पुल निर्माण शुरू कराना और भोजनमाताओं का मानदेय बढ़ाकर पांच हजार रुपये करने का शासनादेश जारी करना शामिल है। रविवार को कांग्रेस विधायक अनुपमा रावत ने हरिद्वार स्थित अजितेश विहार में अपने आवास पर भोजनमाताओं के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने उनकी समस्याएं सुनीं और भरोसा दिलाया कि मानदेय बढ़ाने का मुद्दा सदन में जोरदार तरीके से उठाया जाएगा। उन्होंने सरकार से मांग की कि भोजनमाताओं को आर्थिक राहत देने के लिए मानदेय पांच हजार रुपये करने का शासनादेश जल्द जारी किया जाए। अनुपमा रावत ने लालढांग क्षेत्र में रवासन नदी पर पुल निर्माण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पुल नहीं होने के कारण स्थानीय लोगों को लंबे समय से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नदी पार करने के दौरान कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इसके बावजूद पुल निर्माण का मामला अटका हुआ है। कांग्रेस विधायक ने मांग की कि सोमवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में इस मुद्दे पर निर्णय लेकर पुल निर्माण का रास्ता साफ किया जाए, ताकि क्षेत्र के लोगों को राहत मिल सके। उन्होंने पुल निर्माण के मुद्दे पर भाजपा के पूर्व विधायक पर भी राजनीति करने का आरोप लगाया। विधायक ने कहा कि भोजनमाताएं विद्यालयों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने की जिम्मेदारी निभाती हैं। ऐसे में उनके काम और आर्थिक जरूरतों को देखते हुए मानदेय बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से पांच हजार रुपये मानदेय का शासनादेश जारी करने की मांग की और कहा कि इस मुद्दे पर वह सदन में भी आवाज उठाएंगी। अनुपमा रावत ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार चुनावी साल में कभी खटीमा तो कभी हरिद्वार में कैबिनेट बैठक कर रही है, लेकिन जनता से जुड़े मुद्दों पर ठोस कार्रवाई नहीं दिखाई दे रही। उन्होंने ऐसी बैठकों को आडंबर बताते हुए कहा कि केवल अलग-अलग स्थानों पर बैठकें करने से लोगों की समस्याएं हल नहीं होंगी। सरकार को जनहित से जुड़े मामलों पर निर्णय लेना चाहिए। कांग्रेस विधायक ने स्पष्ट किया कि यदि कैबिनेट बैठक में उनकी मांगों पर फैसला नहीं हुआ तो वह आमरण अनशन का रास्ता अपनाएंगी। अब सोमवार की बैठक पर नजर रहेगी कि सरकार रवासन नदी पर पुल और भोजनमाताओं के मानदेय से जुड़े मुद्दों पर क्या रुख अपनाती है।

