उत्तराखंड में एकल महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना का औपचारिक शुभारंभ किया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में योजना के पहले चरण के तहत चयनित लाभार्थियों को सब्सिडी की पहली किस्त भी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से उनके खातों में भेजी गई।
मुख्यमंत्री सेवा सदन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने योजना का शुभारंभ करते हुए पहले चरण में छह जिलों की 484 एकल महिलाओं को कुल 3 करोड़ 45 लाख 34 हजार 500 रुपये की सब्सिडी ट्रांसफर की। इस योजना के तहत देहरादून जिले की 191, उधमसिंह नगर की 87, नैनीताल की 75, पौड़ी की 60, बागेश्वर की 42 और टिहरी की 23 महिलाओं को लाभ मिला है। योजना के दूसरे चरण में मार्च महीने के पहले सप्ताह में शेष सात जिलों की 540 लाभार्थी महिलाओं को सब्सिडी की राशि ट्रांसफर की जाएगी। मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना की घोषणा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 15 अगस्त 2023 को की थी। उत्तराखंड में बड़ी संख्या में ऐसी महिलाएं हैं जो अविवाहित, तलाकशुदा, परित्यक्ता, निराश्रित या दिव्यांग होने के कारण एकल जीवन जी रही हैं। इन्हीं महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा देने और उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने के उद्देश्य से इस योजना की शुरुआत की गई। इसके बाद महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग ने योजना के प्रस्ताव तैयार किए। जून 2024 में मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को मंत्रिमंडलीय उप समिति को भेजा गया और 16 मई 2025 को कैबिनेट ने इस योजना को अंतिम मंजूरी दी।
योजना के तहत आवेदन प्रक्रिया 18 जून से शुरू हुई थी, जिसमें प्रदेश भर से बड़ी संख्या में एकल महिलाओं ने आवेदन किया। प्राप्त आवेदनों में से कुल 1024 महिलाओं का चयन किया गया है। इन महिलाओं को स्वरोजगार शुरू करने के लिए अधिकतम दो लाख रुपये तक का प्रोजेक्ट तैयार करने का अवसर दिया गया है, जिसमें से 75 प्रतिशत यानी डेढ़ लाख रुपये तक की सब्सिडी राज्य सरकार की ओर से दी जाएगी। लाभार्थी महिला को केवल 50 हजार रुपये का निवेश स्वयं करना होगा। सरकार की ओर से सब्सिडी किस्तों में दी जाएगी। पहले चरण में कुल सब्सिडी का 50 प्रतिशत, दूसरे चरण में 30 प्रतिशत और अंतिम चरण में 20 प्रतिशत राशि जारी की जाएगी। लाभार्थी को छह महीने के भीतर अपना व्यवसाय शुरू करना अनिवार्य होगा। यदि कोई महिला व्यवसाय शुरू नहीं करती है, तो उसे दी गई प्रारंभिक सब्सिडी वापस ली जा सकती है। छह महीने बाद व्यवसाय का निरीक्षण किया जाएगा, जिसके आधार पर आगे की किस्त जारी की जाएगी। इस योजना के अंतर्गत महिलाएं कृषि, बागवानी, पशुपालन, कुक्कुट पालन, भेड़-बकरी पालन, मत्स्य पालन, ब्यूटी पार्लर, छोटे उद्योग और अन्य स्वरोजगार से जुड़े व्यवसाय शुरू कर सकती हैं। योजना का उद्देश्य केवल महिलाओं को रोजगार देना ही नहीं, बल्कि गांव और आसपास के क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करना और पलायन पर रोक लगाना भी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह योजना उन महिलाओं के लिए संबल बनेगी, जो परिस्थितिवश अकेला जीवन जीने को मजबूर हैं। सरकार का लक्ष्य पहले वर्ष में दो हजार एकल महिलाओं को इस योजना से जोड़ने का है, जिसके लिए 30 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि योजना के सकारात्मक परिणाम सामने आने पर इसका दायरा और अधिक बढ़ाया जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकें।

